होली में हर्बल कलर से सेहत भी और समृद्धि भी, देहरादून में सैकड़ों ग्रामीण कर रहे ये नेक काम

यदि आप भी केमिकल से बने रंगों से होली खेलने से डरते हैं, तो घबराइए नहीं, क्योंकि देहरादून में आपके लिए हर्बल गुलाल बनाया गया.

देहरादून: जल्द ही पूरा देश होली के रंगों में सराबोर होने वाला है. लोग अभी से होली की तैयारियों में जुट गए हैं. बाजार में तरह-तरह के रंग मिलेंगे, जिनमें कुछ केमिकल से बने होते हैं, जो लोगों की स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में देहरादून जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं नेचुरल प्रोडक्ट्स से हर्बल रंग बना रही हैं, जो बाजार में खूब पॉपुलर हो रहे हैं.

देहरादून जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर रायपुर ब्लॉक के बरासी गांव में आरती स्वयं सहायता समूह, सरस्वती स्वयं सहायता समूह और राधे राधे स्वयं सहायता समूह की करीब 10 से ज्यादा महिलाएं इन दिनों खेतों में उगने वाले नेचुरल प्रोडक्ट्स और ऑर्गेनिक घरेलू प्रोडक्ट्स से हर्बल रंग तैयार कर रही हैं. ETV भारत ने यह जानने की कोशिश की कि हर्बल रंग कैसे बनते हैं. इस दौरान ETV भारत ने इन रंगों को बनाने वाली महिलाओं से बात की.

चुकंदर से तैयार होता है लाल रंग: रायपुर ब्लॉक के बरासी गांव की महिलाओं अरुणा, अनीता, पूनम, पुष्पा, पूजा और ममता ने कैमरे पर हर्बल रंग बनाने की अलग-अलग प्रोसेस दिखाईं. स्वयं सहायता समूह की मेंबर अरुणा ने बताया कि ये हर्बल रंग ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स से तैयार किए जाते हैं. जैसे चुकंदर से लाल रंग, पालक से हरा रंग, हल्दी से पीला रंग और गेंदे के फूलों से पीला और लाल रंग तैयार किया जाता है.

चुकंदर से तैयार होता है लाल रंग: रायपुर ब्लॉक के बरासी गांव की महिलाओं अरुणा, अनीता, पूनम, पुष्पा, पूजा और ममता ने कैमरे पर हर्बल रंग बनाने की अलग-अलग प्रोसेस दिखाईं. स्वयं सहायता समूह की मेंबर अरुणा ने बताया कि ये हर्बल रंग ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स से तैयार किए जाते हैं. जैसे चुकंदर से लाल रंग, पालक से हरा रंग, हल्दी से पीला रंग और गेंदे के फूलों से पीला और लाल रंग तैयार किया जाता है.

उन्होंने बताया कि इन सभी नेचुरल प्रोडक्ट्स को पहले मिक्सर में पीसा जाता है, फिर जो जूस निकलता है, उसे अरारोट के आटे में मिलाया जाता है. फिर इसे छानकर अलग-अलग रंग बनाए जाते हैं. इन हर्बल रंगों में खुशबू लाने के लिए गुलाब के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है.

पिछले साल डेढ़ क्विंटल से ज़्यादा हर्बल रंग तैयार किए थे: उन्होंने बताया कि हर साल होली से पहले वह इसी तरह ऑर्गेनिक रंग तैयार करती हैं. पिछले साल उन्होंने डेढ़ क्विंटल से ज़्यादा हर्बल रंग तैयार किए थे. इसी तरह दूसरी महिलाएं भी उनके साथ मिलकर हर्बल रंग बनाने का काम कर रही हैं.

स्वयं सहायता समूह की मेंबर अरुणा के पति अनूप मनवाल कहते हैं कि यह अच्छी बात है कि महिलाएं घर से काम कर रही हैं और अपनी खुद की कमाई कर रही है. इससे उन्हें एक्स्ट्रा इनकम तो होती ही है, साथ ही उन्हें बाज़ार से रंग भी नहीं खरीदने पड़ते.

₹200 प्रति kg तक बिकते हैं हर्बल रंग: अनूप मनवाल ने बताया कि वह इन महिलाओं के लिए बाज़ार से ₹50 प्रति kg के हिसाब से अरारोट का आटा लाते हैं, जिससे महिलाएं अलग-अलग रंग तैयार करती हैं और फिर उन्हें ₹200 प्रति kg तक बेचती हैं.

सहसपुर ब्लॉक में बनाया जा रहा सबसे ज्यादा रंग: देहरादून ज़िले की NRLM की सहायक परियोजना निदेशक सोनम गुप्ता ने बताया कि देहरादून ज़िले के पांच अलग-अलग ब्लॉक में हर्बल रंग बनाने का काम चल रहा है. होली के लिए हर्बल रंगों का सबसे ज़्यादा प्रोडक्शन सहसपुर ब्लॉक में हो रहा है, जहां अब तक 350 kg हर्बल रंग बन चुके हैं. इन रंगों में सभी नेचुरल चीज़ों का इस्तेमाल किया गया है.

हर ब्लॉक में 100 से 150 kg हर्बल रंग बनाया गया: उन्होंने बताया कि उनके स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए गए हर्बल रंग लोगों में बहुत पॉपुलर हैं. मार्केटिंग की कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि ये लोकल मार्केट में आसानी से बिक जाते हैं. ज़िले के हर ब्लॉक में होली से पहले ही 100 से 150 kg हर्बल रंग बन चुके हैं. यह प्रोसेस अभी भी जारी है. पूरे देहरादून ज़िले में 25-30 स्वयं सहायता समूह हैं, जिनमें अभी 300 से ज़्यादा ग्रामीण महिलाएं हर्बल रंग बनाने में लगी हुई हैं.

होली खेलने से पहले इन बातों का ध्यान रखें: देहरादून के दून मेडिकल हॉस्पिटल की सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. भव्या संगल सलाह देती हैं कि होली के दौरान हमें सिर्फ़ ऑर्गेनिक रंगों का ही इस्तेमाल करना चाहिए. केमिकल वाले रंगों से स्किन पर कई तरह के रिएक्शन हो सकते हैं, जिसमें रेडनेस, जलन और खुजली शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि होली के बाद अक्सर ऐसे मरीज़ उनके पास आते हैं. उन्होंने सलाह दी कि होली के दौरान सिर्फ़ ऑर्गेनिक और हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करना चाहिए. डॉ. भव्या ने होली खेलने का सही तरीका भी बताया.

उन्होंने कहा कि रंग लगाने या उनसे खेलने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए. जैसे ही होली के रंग लगाने से पहले हमें अपने शरीर पर तेल या सनस्क्रीन की एक मोटी परत लगानी चाहिए, और रंगों के संपर्क में आने से बचने के लिए पूरी बाजू के या पूरी तरह से ढके हुए कपड़े पहनने चाहिए. अगर होली के रंग लगाने के बाद आपको कोई जलन, खुजली या रेडनेस महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

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