अंकिता भंडारी हत्याकांड की होगी सीबीआई जांच उत्तराखंड के CM धामी ने की सिफारिश

संक्षेप: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘हमने उनके माता-पिता से बात की, जिन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि जांच CBI से करवाई जानी चाहिए। उनकी बात का सम्मान करते हुए, हम इस मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश कर रहे हैं।’

लंबी खींचतान के बाद उत्तराखंड सरकार बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए तैयार हो गई है। इस बारे में जानकारी देते हुए शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अंकिता भंडारी के माता-पिता की बात का सम्मान करते हुए, हम इस मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश कर रहे हैं।

अंकिता भंडारी पौड़ी जिले के एक रिसॉर्ट में कर्मचारी थी। आरोप है कि रिसॉर्ट में अंकित भंडारी पर किसी शख्स को ‘विशेष सेवा’ देने के लिए दवाब डाला गया था और इससे मना करने पर उसकी हत्या कर दी गई थी। निचली अदालत ने इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि इस मामले को लेकर हाल ही में वायरल हुई एक ऑडियो क्लिप में इस प्रकरण में किसी VIP के भी शामिल होने की बात कही गई। जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर राज्य में धरना प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। जिसके बाद शुक्रवार को राज्य सरकार ने इस प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का फैसला किया और कहा कि इसके लिए सिफारिश की जा रही है।

धामी बोले- सरकार ने बिना भेदभाव से की कार्रवाई

इस फैसले को लेकर सीएम धामी ने अपना एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा, ‘स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने बिना किसी भेदभाव के और पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता के साथ कार्रवाई प्रारम्भ की और तत्काल एक महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में एक SIT का गठन किया गया और प्रकरण से जुड़े हुए सभी अभियुक्तों को तुरंत गिरफ्तार किया गया। उसकी ठोस पैरवी न्यायालय में की गई। उसी का परिणाम हुआ कि ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिली। इसके बाद SIT जांच के बाद अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार ने शुरू से लेकर अंत तक पारदर्शिता व दृढता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है।’

लोगों ने भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की’

आगे उन्होंने कहा, ‘हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई ऑडियो क्लिप्स के संबंध में अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं और इसकी जांच जारी है। कुछ लोगों ने इस दौरान अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भ्रामक स्थितियां पैदा करने का प्रयास किया है, और प्रदेश में भ्रम की स्थिति पैदा करने का काम किया है, ऐसे में सरकार का दायित्व है कि देवतुल्य जनता को इस स्थिति से निकाला जाए, उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाए। हमने सोचा कि इस मामले में सबसे पीड़ित पक्ष उनके माता-पिता हैं, और उनका पक्ष जरूर जानना चाहिए। इसलिए मैंने उनके माता-पिता से बात की है, और उन्हीं के द्वारा कहा गया है कि मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। जिसका सम्मान करते हुए हम इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर रहे हैं।’

अंकिता को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता’

उधर सीएम ने अपना जो वीडियो शेयर किया, उसके साथ उन्होंने लिखा, ‘बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंकिता के माता-पिता ने भेंट के दौरान CBI जांच की मांग रखी थी जिसका सम्मान करते हुए हमारी सरकार ने इस मामले की जांच CBI से कराने का निर्णय लिया है। मातृशक्ति की सुरक्षा एवं उनके सम्मान के लिए हमारी सरकार सदैव प्रतिबद्ध रही है। देवभूमि उत्तराखंड में कानून का राज है, यहां दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।’

बुधवार की रात सीएम से मिले थे अंकिता के माता-पिता

इससे पहले अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी ने बुधवार देर रात यहां मुख्यमंत्री आवास में धामी से मुलाकात की थी और अपनी बेटी की हत्या की जांच के संबंध में अपनी भावनाओं से उन्हें अवगत कराया था। वहीं एक दिन पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह इस मामले में पहले अंकिता के माता-पिता से बातचीत करेंगे और उनकी इच्छा के अनुसार हत्याकांड की जांच के बारे में फैसला लिया जाएगा।

वहीं यह मामला हाल ही में उस वक्त सुर्खियों में आ गया था, जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अपना एक ऑडियो जारी किया था। भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर के साथ कथित बातचीत के इस ऑडियो में सनावर यह कहते हुए सुनाई दे रही थीं कि उन पर भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम लेने का दवाब था। सनावर, राठौर की कथित पत्नी हैं। सनावर ने अपने एक ऑडियो में इस हत्याकांड में कथित ‘VIP’ के शामिल होने की बात कहकर सियासी हलचल पैदा कर दी थी। इस खुलासे के बाद पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदेश में कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक और सामाजिक संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे थे।

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