साइबर क्राइम कंट्रोल पुलिस अधिकारी बोले हमें भी आते हैं मुद्रा लोन के फ्रॉड मेसेज, लोगों को दी सावधान रहने की जानकारी

देहरादून: उत्तराखंड में साइबर अपराध लगातार खतरनाक रूप लेते जा रहे हैं. साल 2025 में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि साइबर ठग अब पुराने तरीकों को छोड़कर नई तकनीकों का सहारा ले रहे हैं. ओटीपी फ्रॉड, फर्जी कॉल और सोशल मीडिया स्कैम के बाद अब डिजिटल अरेस्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आवाज की नकल जैसे मामले तेजी से बढ़े हैं.
उत्तराखंड में साइबर ठगी का बदला चेहरा: इसका सीधा असर आम लोगों की जमा पूंजी पर पड़ रहा है. राज्य के शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी साइबर अपराधियों की सक्रियता बढ़ी है. पुलिस के अनुसार ठग लोगों को डर लालच और सरकारी कार्रवाई का भय दिखाकर, खुद ही पैसे ट्रांसफर करवाने लगे हैं. इतना ही नहीं लगातार बढ़ रहे मामलों में कुछ नए तरीके से साइबर अपराध करने के तरीके भी सामने आये हैं.
उत्तराखंड में 2025 में साइबर अपराध: उत्तराखंड में साइबर अपराधों की संख्या किस कदर बढ़ रही है, इसका अंदाजा सरकारी आंकड़ों से लगाया जा सकता है. साल 2025 में 10,300 साइबर अपराध की घटनाएं प्रदेश में दर्ज की गई हैं. अधिकतर मामलों में यह देखा गया है कि लोग लालच के चक्कर में साइबर अपराधियों से अपना सब कुछ लुटा रहे हैं. 90 करोड़ रुपयों से अधिक साइबर अपराधी साल 2025 में उत्तराखंड की जनता से लूट चुके हैं. पुलिस के अनुसार-
लगभग 50 फ़ीसदी मामले फोन मैसेज और लालच की वजह से घटे हैं. पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में बैठे साइबर फ्रॉड अपराधी लोगों को घर बैठे ही चूना लगा रहे हैं. साल 2025 में राजधानी में 24 लोगों को डिजिटल अरेस्ट किया गया है. पूरे उत्तराखंड में यह संख्या 40 से अधिक है. कई बार लोग मैसेज पर आए लिंक को खोलकर, अज्ञात कॉल को उठाकर और किसी अनजान व्यक्ति से सोशल मीडिया पर अपनी थोड़ी सी जानकारी भी शेयर करने के बाद इनका शिकार हुए हैं. -उत्तराखंड पुलिस-
उत्तराखंड में हाल हुई साइबर ठगी की घटनाएं: हाल में हुई साइबर अपराध के कई ऐसे मामले सामने आये हैं, जिनके बारे में सुनकर लोग चौंक रहे हैं. जैसे अल्मोड़ा में एक महिला को साइबर ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर करीब 27 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा. लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए महिला को मानसिक दबाव में रखा गया. अलग-अलग खातों से करीब 1.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए. मामले में कुमाऊं साइबर क्राइम कंट्रोल थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
आरटीओ चालान के नाम पर भेजा फर्जी लिंक: देहरादून के नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में आरटीओ चालान के नाम पर भेजे गए एक फर्जी लिंक ने एक व्यक्ति की जिंदगी भर की बचत पर डाका डाल दिया. लिंक खोलते ही मोबाइल में खतरनाक एप्लिकेशन इंस्टॉल हो गया और खाते से लगातार ट्रांजेक्शन शुरू हो गए. ठगों ने न केवल खाते की राशि निकाली, बल्कि एफडी तुड़वाकर भी रकम ट्रांसफर कर ली. पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है. क्या जवान, क्या बूढ़े सभी इनके निशाने पर हैं.
80 साल के बुजुर्ग से ठग लिए 20 लाख रुपए: नैनीताल में तो 80 वर्षीय बुजुर्ग के साथ हुई साइबर ठगी ने पुलिस को भी चौंका दिया. साइबर अपराधियों ने खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच और सीबीआई अधिकारी बताकर बुजुर्ग को तीन दिन तक व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट में रखा. मनी लॉन्ड्रिंग और आधार कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाकर उनसे 20 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए. बाद में एसटीएफ और साइबर पुलिस ने जयपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया.
निवेश स्कैम से करोड़ों की ठगी: उत्तराखंड में फर्जी निवेश स्कैम के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. शेयर मार्केट और मोटे मुनाफे का लालच देकर लोगों को फर्जी ग्रुप और लिंक से जोड़ा जा रहा है. रुड़की के बहादराबाद क्षेत्र में एक व्यक्ति से 50 लाख रुपये से अधिक की ठगी इसी तरीके से की गई. पहले छोटी रकम जमा करवाई गई और बाद में बड़ा निवेश करने को कहा गया.
बच्चा मोबाइल पर खेल रहा था गेम, पिता के अकाउंट से उड़ गए पैसे: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में तो साइबर ठगी का अजीब-ओ-गरीब मामला सामने आया था. फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी आमिर अहमद सैफी का बेटा उनके मोबाइल पर वीडियो गेम खेल रहा था. इसी के थोड़ी देर बाद आमिर के मोबाइल पर 1 लाख रुपए निकालने का मैसेज आ गया. इतना ही नहीं थोड़ी देर में जोमैटो से खाने का ऑर्डर करने के 608 रुपए कटने का मैसेज भी आ गया.
देशभर में सामने आए साइबर फ्रॉड के 12 नए तरीके: पुलिस की मानें तो अलग-अलग तरीके से साइबर अपराधी लोगों को चूना लगा रहे हैं. ये बात भी सही है कि जितना इंसान इनसे बचने की कोशिश कर रहा है, उतना ही ये लोग अपने अपराध के तरीके को बदल रहे हैं. हाल में देखा गया कि कई लोगों के पास फोन पर हेलो कहते ही, सामने से परिवार के लोगों की आवाज आई और बातों ही बातों में साइबर अपराधी ने अपराध कर पैसे खाते से निकाल लिए. पुलिस भी लगातार ऐसे अपराधों के बारे में लोगों को बता रही है और जागरूक कर रही है. फिलहाल पुलिस ने लोगों को 12 तरह के साइबर अपराधों से सावधान रहने को कहा है.











साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. अब अपराधी सिर्फ ओटीपी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि AI तकनीक से आवाज की नकल कर परिवार के सदस्य की तरह बात कर रहे हैं. लोगों को यह बताया जाता है कि कोई एक्सीडेंट या केस में फंस गया है और तुरंत पैसे चाहिए. फर्जी मुद्रा लोन के मैसेज भी तेजी से फैल रहे हैं, मैं खुद भी ऐसे मेसेज प्रात कर चुका हूं. इसके साथ ही अपराधी आपके द्वारा सोशल मिडिया पर डालें गए वीडिओ के ऑडियो को भी अपराध के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. मुद्रा लोन मुद्रा लोन 10 लाख से अधिक नहीं होता. इससे ज्यादा का दावा करने वाला हर मैसेज या कॉल संदिग्ध है. हम उत्तराखंड में भी इस बदलते साइबर अपराध से दो चार हो रहे हैं, लेकिन जब तक इंसान जागरूक नहीं होगा तब तक कुछ नहीं हो सकता है.
-कुश मिश्रा, एएसपी, साइबर क्राइम कंट्रोल पुलिस-
एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि, सब कुछ गंवा देने के बाद ही इंसान साइबर क्राइम कंट्रोल पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करवाता है, लेकिन तब तक बात बहुत आगे बढ़ जाती है. हम लगातार कोशिश करते हैं कि पैसे वापस आएं. कई मामलों में पुलिस ने तुरंत पैसे दिलवाने और अपराधियों को पकड़ने का काम किया है.
साइबर ठगी से बचाव के उपाय: उत्तराखंड साइबर पुलिस के एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि अगर आप साइबर ठगी से बचना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा- इनमें प्रमुख हैं-
किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर घबराकर फैसला न लें. सरकारी एजेंसी कभी व्हाट्सएप पर पूछताछ नहीं करती है. किसी लिंक पर क्लिक करने से पहले पुष्टि करें. OTP, UPI पिन और बैंक डिटेल साझा न करें. अगर आपके घर के सदस्य भी आपने नंबर से कॉल करें और पैसे मांगे या अन्य नबर से आवाज हूबहू हो और कुछ बातें करें तो पहले पूरी तरह से वेरिफाई कर लें. उसके बाद ही आगे बढ़ें. संदेह होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें.
-कुश मिश्रा, एएसपी, साइबर क्राइम कंट्रोल पुलिस-
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