
हरिद्वार हरकी पैड़ी जा रहे जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने रोक दिया। इसे लेकर काफी विरोध हो रहा है। गिरि ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का यूजीसी कानून हिंदुओं को तोड़ रहा है। गिरि यूजीसी कानून के विरोध में उपवास करने हरकी पैड़ी जा रहे थे। बता दें कि यूजीसी कानून के विरोध में यति नरसिंहानंद बीते शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में भी विरोध दर्ज करने जा रहे थे, जिन्हें यूपी पुलिस ने रोका था।
जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने नारसन बॉर्डर पर रोककर वापस भेज दिया। वह हरिद्वार में हर की पैड़ी पर सनातन धर्म रक्षा के समर्थन में एक दिन का उपवास करने जा रहे थे।
पुलिस की रोक के बाद वापस लौटना पड़ा
पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी। बॉर्डर पर रोक-टोक के बाद स्वामी नरसिंहानंद गिरि को गाजियाबाद की ओर लौटना पड़ा। इस कार्रवाई को लेकर उनके समर्थकों में चर्चा रही, वहीं पुलिस का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
पुलिस से नोंक-झोंक
यति नरसिंहानंद को जब पुलिस ने बॉर्डर पर रोका तो इस दौरान उनकी पुलिस से नोंक-झोंक हुई। नरसिंहानंद ने पुलिस को समझाने की कोशिश की लेकिन पुलिस नहीं मानी। नरसिंहानंद ने कहा कि वे न तो सीएम पुष्कर सिंह धामी के आवास जा रहे हैं और न ही कहीं और… मैं घाट जा रहा हूं.. क्या वहां भी जाने नहीं दोगे? पुलिस-प्रशासन के मान-मनौव्वल के बाद यति नरसिंहानंद को वापस लौटना पड़ा।
हिंदुओं को तोड़ रहा यूजीसी कानून
नरसिंहानंद ने आरोप लगाया कि यूजीसी कानून हिंदुओं को तोड़ने वाला है। यह अरब देशों द्वारा बनाया गया कानून है और हिंदुओं के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। नरसिंहानंद यूजीसी कानून का विरोध कर रहे हैं।
क्या है विवाद
यूजीसी कानून 15 जनवरी 2026 से देशभर में लागू हो गया है। मामले में यूजीसी का कहना है कि इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना है। छात्रों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य डिग्री देना है। किसी धर्म को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। यूजीसी चाहता है कि हर संस्थान उसके तय ढांचे में ही कोर्स, सिलेबस और परीक्षा प्रणाली चलाए, जिससे परंपरागत शिक्षा पद्धतियों को खतरा बताया जा रहा है। वहीं, विरोध करने वालों का कहना है कि इससे सनातन शिक्षा प्रणाली कमजोर होगी। हिंदू समाज की आंतरिक विविधता खत्म होगी। आरोप है कि नए नियमों से गुरुकुल, वेद विद्यालय और संस्कृत/धार्मिक शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता कम हो जाएगी
